कालिया ठाकर गेडिया हनुमान मंदिर – सुरेन्द्रनगर का पवित्र हनुमानजी धाम
05/10/2025
(कालिया ठाकर गेडिया हनुमान | हनुमान मंदिर सुरेन्द्रनगर | बजरंगबली मंदिर | गुजरात का धार्मिक स्थल | GyaanTrek)
गुजरात के सुरेन्द्रनगर जिले में स्थित कालिया ठाकर गेडिया हनुमान मंदिर, भगवान हनुमान को समर्पित एक अत्यंत पूजनीय स्थान है। यह मंदिर अपनी दिव्य शक्ति और भक्तिपूर्ण वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। मंगलवार और शनिवार को यहाँ विशेष आरती एवं भजन संध्या का आयोजन होता है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं।
इतिहास और स्थानीय महत्व
स्थानीय परंपराओं के अनुसार, इस मंदिर की मूर्ति कड़िया और ठाकर समाज के लोगों द्वारा स्थापित की गई थी, जो इस क्षेत्र में लंबे समय से बसे हुए हैं। धीरे-धीरे यह स्थान ‘गेडिया’ नाम से प्रसिद्ध हुआ और आज यह श्रद्धा एवं आस्था का केंद्र बन चुका है। कई भक्तों ने हनुमानजी की कृपा से अपने जीवन में अद्भुत परिवर्तन और सुरक्षा का अनुभव साझा किया है।
मंदिर का अनुभव और विशेषताएँ
मंदिर का वातावरण अत्यंत शांत और आध्यात्मिक है। यहाँ की मूर्ति को सिंदूर, फूलमालाओं और वस्त्रों से सजाया जाता है। भक्त तेल, नारियल और मिठाई का प्रसाद चढ़ाते हैं। मंदिर परिसर में सामूहिक भजन, आरती और सत्संग होते हैं। दर्शन के बाद भक्तों को मन की शांति और ऊर्जा की अनुभूति होती है।
पूजा विधि, समय और दर्शन के श्रेष्ठ दिन
दर्शन समय:
सुबह: 7:00 बजे – 11:30 बजे
शाम: 4:00 बजे – 8:00 बजे
मंगलवार और शनिवार विशेष रूप से पवित्र दिन माने जाते हैं। इन दिनों भक्तों की भीड़ अधिक रहती है और विशेष आरती एवं भजन का आयोजन होता है। हनुमान जयंती के अवसर पर भंडारा, सत्संग और विशेष पूजा होती है।
त्यौहार एवं सामुदायिक आयोजन
- हनुमान जयंती – विशेष आरती और भव्य सत्संग
- साप्ताहिक भंडारा एवं सामूहिक भजन
- स्थानीय भक्तों द्वारा आयोजित सत्संग और आरती कार्यक्रम
कैसे पहुँचे और आस-पास के स्थल
यह मंदिर सुरेन्द्रनगर शहर से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन सुरेन्द्रनगर है, जहाँ से आप स्थानीय टैक्सी या बस द्वारा मंदिर तक पहुँच सकते हैं। आसपास के गाँवों से भी नियमित वाहन सेवाएँ उपलब्ध हैं।
भक्तों के लिए सुझाव
• मंदिर में सिंदूर, तेल, नारियल या मिठाई का प्रसाद चढ़ाएँ।
• शांतिपूर्ण दर्शन के लिए सुबह या शाम का समय सर्वोत्तम है।
• मंदिर में प्रवेश से पहले जूते बाहर उतारें और आरती के दौरान मौन रखें।
• यदि संभव हो तो भंडारे में सम्मिलित होकर सामुदायिक भक्ति का अनुभव करें।