रमेश पारेख – हृदय की आवाज
29/07/2025
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गुजराती साहित्य के एक अमर कवि, रमेश पारेख (27 नवंबर 1940 – 17 मई 2006) अमरेली के निवासी थे। उन्होंने गजल, गीत और बाल साहित्य में उल्लेखनीय योगदान दिया। वे पुरस्कार विजेता कवि रहे थे और उन्होंने गुजराती भाषा को एक नया भाव दिया था।
उनका जन्म अमरेली के कापोल वाणिक परिवार में हुआ था। स्कूल में उनकी पहली कहानी "प्रेतनी दुनिया" प्रकाशित हुई थी। उन्हें चित्रकला के प्रति बहुत रुचि थी, लेकिन सर जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट में पढ़ने के लिए फीस न होने के कारण उन्होंने उस सपने को अलविदा कह दिया। 1960 में सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी उनका शब्द और संगीत के प्रति प्रेम बरकरार रहा।
साहित्यिक यात्रा
- 1967 से काव्य रचनाएँ शुरू कीं
- 1968 में अनिल जोशी की मदद से उनकी रचनाएँ प्रकाशित होने लगीं
- 1988 में सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्ति लेने के बाद उन्होंने पूरा समय साहित्य को समर्पित कर दिया
- 1997 में राजकोट तबादला हुआ और वहीं 2006 में हृदय रोग से उनका निधन हो गया
सम्मान और पुरस्कार
- कुमार चंद्रक (1970)
- रणजितराम सुवर्ण चंद्रक (1986)
- उमा-स्नेहरश्मि इनाम (1978-79, "खडिंग" के लिए)
- साहित्य अकादमी अवार्ड (1994, "वितान सूड बीज" के लिए)
- स्टेट फिल्म अवार्ड – सर्वश्रेष्ठ गीतकार
- नरसिंह मेहता अवार्ड (2004)
व्यक्तिगत जीवन
- पत्नी: रसीलाबेन (1972)
- बेटियां: नेहा (1974), नीरज (1975)
- मृत्यु: 17 मई 2006, राजकोट
"मैं पिंजरे की चांदनी हूँ, पंछी तो तुम हो,
मैं तो शब्द हूँ साहब, सार्थक तो तुम हो।" – रमेश पारेख