अंबाजी मंदिर – गुजरात की गब्बर पहाड़ी पर स्थित माँ अम्बा का दिव्य शक्तिपीठ
05/11/2025
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गुजरात के बनासकांठा ज़िले के शांत और पवित्र नगर अंबाजी में स्थित अंबाजी मंदिर भारत के सबसे प्राचीन और पूजनीय शक्तिपीठों में से एक है। माँ अंबा (अंबाजी माता) को समर्पित यह मंदिर हर वर्ष लाखों भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस मंदिर का आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व अत्यंत गहरा है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यहीं पर देवी सती का हृदय गिरा था, जिससे यह स्थान 51 शक्तिपीठों में एक बन गया।
अन्य मंदिरों के विपरीत, अंबाजी मंदिर में देवी की कोई मूर्ति या प्रतिमा स्थापित नहीं है। इसके स्थान पर माँ अंबा की दिव्य शक्ति का प्रतीक एक श्री यंत्र है — यह एक पवित्र ज्यामितीय आकृति है, जो देवी की ब्रह्मांडीय शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है।
ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में अपमान के कारण आत्मदाह किया, तो भगवान शिव अत्यंत शोकाकुल होकर उनके शरीर को लेकर पूरे ब्रह्मांड में भटकने लगे। भगवान को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 भाग कर दिए, जो भारत के विभिन्न स्थानों पर गिरे — और प्रत्येक स्थान एक शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
अंबाजी में माना जाता है कि देवी सती का हृदय इस स्थान पर गिरा था, इसलिए अंबाजी मंदिर को अक्सर “शक्तिपीठों का हृदय” कहा जाता है। इस मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है और इसका उल्लेख स्कंद पुराण तथा मार्कंडेय पुराण में भी मिलता है।
मंदिर की वास्तुकला और विशेषताएँ
मुख्य मंदिर, जिसे कुंडली मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, सफेद संगमरमर से निर्मित एक अद्भुत वास्तुशिल्प का उदाहरण है। मंदिर की दीवारों पर वेदों और श्लोकों के पवित्र मंत्र खुदे हुए हैं, जो भक्तों को शांति और आध्यात्मिकता का अनुभव कराते हैं। मंदिर के गरभगृह (मुख्य गर्भगृह) में चांदी की प्लेट पर अंकित श्री यंत्र स्थापित है, जिसे लाल वस्त्र से ढका जाता है। मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए अंदर फोटोग्राफी पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है।
गब्बर पहाड़ी – अंबाजी की पवित्र पर्वतभूमि
मुख्य अंबाजी मंदिर से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गब्बर पहाड़ी को देवी माँ का मूल आसन (प्रथम निवास स्थान) माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि माँ अंबाजी का प्रथम प्रकटस्थान यही था। यहाँ पर एक प्राकृतिक शिलाखंड पर माँ के चरणों (चरण पदुका) के निशान बने हैं, जिन्हें अत्यंत श्रद्धा और भक्ति से पूजित किया जाता है।
गब्बर पहाड़ी से अरावली पर्वतमाला और आसपास के हरित परिदृश्य का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। हर वर्ष हजारों भक्त 999 सीढ़ियाँ चढ़कर पहाड़ी की चोटी तक पहुँचते हैं, जहाँ वे माँ के दर्शन कर दिव्य ऊर्जा और शांति का अनुभव करते हैं।
अंबाजी रोपवे – श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधा
जो भक्त सीढ़ियाँ नहीं चढ़ सकते, उनके लिए अंबाजी रोपवे एक सुविधाजनक और मनोरम साधन है, जिससे वे सहजता से गब्बर पहाड़ी के मंदिर तक पहुँच सकते हैं। यह रोपवे न केवल यात्रा को सरल बनाता है, बल्कि पहाड़ी और आसपास की सुंदरता का आकाशीय दृश्य भी प्रदान करता है।
| सेवा का प्रकार | विवरण |
|---|---|
| रोपवे का नाम | उड़न खटोला – माँ अंबाजी रोपवे |
| स्थान | गब्बर रोड, डांटा तालुका, बनासकांठा ज़िला, गुजरात – 385110 |
| दूरी | 363 मीटर (क्षैतिज), 138 मीटर (ऊर्ध्वाधर ऊँचाई) |
| अवधि | एक तरफ़ का समय – लगभग 2 से 3 मिनट |
| समय | सुबह 7:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक (त्योहारों में समय बदल सकता है) |
| टिकट मूल्य | ₹125 (वयस्क), ₹70 (बच्चा) |
| आधिकारिक बुकिंग | udankhatola.com |
| हेल्पलाइन | 1800-202-4050 |
अखंड ज्योत – अनंत प्रकाश की प्रतीक
अंबाजी मंदिर की सबसे अद्भुत विशेषताओं में से एक है अखंड ज्योत, अर्थात वह अनंत दीपक जो सदियों से निरंतर जल रहा है। मंदिर के पुजारियों के अनुसार, यह ज्योत प्राचीन काल से आज तक कभी बुझी नहीं है। यह दीपक अनंत भक्ति, शक्ति और माँ की दिव्यता का प्रतीक माना जाता है और इसे भारत की सबसे पुरानी सतत जलती ज्योतियों में से एक माना जाता है।
पर्व एवं उत्सव
भादरवी पूर्णिमा (सितंबर माह) के दौरान अंबाजी मंदिर का परिसर जीवंत हो उठता है। इस अवसर पर पूरे भारत से 15 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के समीप आयोजित भव्य मेला में भक्ति संगीत, पारंपरिक गरबा नृत्य, और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भक्तों को अद्भुत अनुभव प्रदान करती हैं।
नवरात्रि उत्सव भी यहाँ का एक प्रमुख आकर्षण है। इस पावन अवसर पर गुजरात और राजस्थान सहित कई राज्यों से भक्त माँ अंबा के दर्शन के लिए आते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर में गरबा रात्रियाँ, भजन संध्याएँ, और माँ अंबा को समर्पित विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।
अंबाजी मंदिर से जुड़ी रोचक और दुर्लभ जानकारियाँ
अंबाजी मंदिर भारत के उन कुछ मंदिरों में से एक है, जहाँ देवी की कोई मूर्ति या प्रतिमा नहीं है। यहाँ पूजा का केंद्र पवित्र श्री यंत्र है, जो माँ की दिव्य शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
यहाँ की अखंड ज्योत (अनंत दीप) के बारे में कहा जाता है कि यह भगवान श्रीकृष्ण के समय से निरंतर जल रही है, और आज तक कभी बुझी नहीं।
पूर्णिमा (पूर्ण चंद्र) की रातों में गब्बर पहाड़ी पर चाँदनी की किरणें जब श्री यंत्र पर प्रतिबिंबित होती हैं, तो इसे अत्यंत शुभ और दिव्य योग माना जाता है।
मंदिर तक जाने वाली 999 सीढ़ियाँ आत्मिक उन्नति और आत्मसंयम का प्रतीक हैं।
नवरात्रि के दौरान, हजारों श्रद्धालु नंगे पाँव गुजरात और राजस्थान से 50 से 100 किलोमीटर तक की यात्रा कर माँ अंबा के दर्शन करने आते हैं — इसे भक्ति और विश्वास का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है।
आवास और भोजन की सुविधाएँ
अंबाजी एक विकसित तीर्थस्थल है, जहाँ श्रद्धालुओं के लिए बजट से लेकर लग्ज़री तक सभी प्रकार के आवास उपलब्ध हैं। भक्तगण अंबाजी मंदिर ट्रस्ट धर्मशाला, विभिन्न गेस्ट हाउस या पास के होटलों में ठहर सकते हैं।
भोजन की व्यवस्था भी यहाँ अत्यंत संतोषजनक है। अनेक शुद्ध शाकाहारी रेस्तरां में स्वादिष्ट गुजराती थाली और पारंपरिक स्नैक्स उपलब्ध हैं। प्रमुख त्योहारों के दौरान मंदिर ट्रस्ट द्वारा निःशुल्क प्रसाद भोज की भी व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा, आसपास के भोजनालयों में चाय, नाश्ता और स्थानीय मिठाइयाँ जैसे मोहनथाल और सुखड़ी विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।